Haryana Police: हरियाणा पुलिस कांस्बेटल भर्ती प्रक्रिया में हाईकोर्ट की ओर से आरक्षित वर्ग के उन अभियर्थियों को राहत दी गई है जिन्होंने सामान्य वर्ग के कट-ऑफ से अधिक अंक हासिल करने के बावजूद अगले चरण की परीक्षा से बाहर किए जाने को चुनौती दी थी।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम आदेश के अंतर्गत सीईटी-2 परीक्षा में प्रोविजनल आधार पर शामिल होने की अनुमति दे दी है। इस मामले की सुनवाई न्यायाधीश जे एस पुरी की अदालत में हुई। अदालत के सामने दायर याचिकाओं में अभ्यर्थियों के वकील रजत मोर ने कहा कि उन्होंने हरियाणा पुलिस में पुरुष कांस्टेबल (जीडी) और पुरुष कांस्टेबल (जीआरपी) पदों के लिए आवेदन किया था।
भर्ती प्रक्रिया के अंतर्गत पहले सीईटी-1 का आयोजन किया गया था जो केवल शॉर्टलिस्टिंग के उद्देश्य से था। इसमें सामान्य वर्ग के लिए 50 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के लिए 40 प्रतिशत अंक निर्धारित थे।
अदालत को क्या बताया गया
अदालत को बताया गया कि तमाम अभ्यर्थियों ने आरक्षित वर्ग के लिए निर्धारित न्यूनतम अंक प्राप्त कर सीईटी-1 पास कर लिया था और वे सीईटी-2 के लिए पात्र हो गए थे। लेकिन इसके बावजूद उन्हें फिजिकल टेस्ट के लिए नहीं बुलाया गया। सीईटी-2 के लिए अलग से श्रेणीवार कट-ऑफ लागू कर दी गई, जिसकी वजह से उन्हें बाहर कर दिया गया, जबकि उनके अंक सामान्य वर्ग के कट-ऑफ 52.1796687 से अधिक थे।
अदालत को याचिकाकर्ताओं ने दलील देते हुए कहा कि किसी आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार के अंक सामान्य वर्ग के कट-ऑफ से अधिक हैं, तो उसे सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार के रूप में माना जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले “राजस्थान हाई कोर्ट बनाम रजत यादव” का हवाला भी दिया गया, जिसमें कहा गया था कि चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में उम्मीदवारों पर पहले ओपन/जनरल कैटेगरी के आधार पर विचार किया जाना चाहिए।
जबकि हरियाणा सरकार की ओर से तथा हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की ओर से अधिवक्ता संजीव कौशिक ने याचिका का विरोध किया। उनका कहना था कि भर्ती नियमों के अनुसार हर श्रेणी के लिए अलग-अलग मानक तय हैं और शॉर्टलिस्टिंग भी श्रेणीवार ही की जानी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक अन्य मामले का हवाला देते हुए कहा कि इस मुद्दे पर अंतिम स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
हाईकोर्ट ने दिए ये निर्देश
हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार और हरियाणा स्टाफ सलेक्शन कमीशन को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं ने सामान्य वर्ग के कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए हैं और सुप्रीम कोर्ट का हालिया निर्णय भी उनके पक्ष में है, इसलिए उन्हें फिलहाल सीईटी-2 परीक्षा में प्रोविजनल रूप से भाग लेने दिया जाए। इस मामले पर अगली सुनवाई 02 जुलाई 2026 को होगी।






