Minimum Wage Hike In India: मजदूरों की दिहाड़ी मजदूरी को लेकर एक बार फिर देश में चर्चा तेज हो गई है। हरियाणा और यूपी के बाद अब पंजाब सरकार ने भी न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का फैसला लिया है। सरकार के इस फैसले के बाद मजदूरों में थोड़ी सी आस जागी है। लेकिन अभी भी स्थिति तो संतोषजनक नहीं है। दरअसल, केंद्र सरकार के लेबर कोड के मुताबिक जो मजदूरी तय की गई है, उससे सभी राज्य अब भी पीछे हैं।
मजदूरों की रोजर्मरा के हिसाब अब भी मजदूरी कम
हरियाणा और यूपी सरकार पहले ही मजदूरी दर बढ़ाने का ऐलान कर चुके हैं। अब पंजाब सरकार ने भी मजदूरी दर बढ़ाने का ऐलान कर दिया है। बढ़ती महंगाई को देखते हुए राज्य सरकारों की ओर से मजदूरी दर को बढ़ाने का फैसला लिया गया। लेकिन जमीनी हकीकत को देखा जाए तो मजदूरों की रोजर्मरा जरूरतों को देखा जाए तो इस हिसाब से ये मजदूरी अब भी कम है। खाने-पीने से लेकर किराए में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है उस हिसाब से मजदूरों का वेतन बहुत कम है।
केंद्र सरकार का लेबर कोड और राज्यों की हकीकत
केंद्र सरकार के लेबर कोड के अनुसार अकुशल मजदूरों को करीब 20,358 रुपये प्रति माह मिलना चाहिए, ताकि वो अपना जीवन थोड़ा आराम से चला सकें। लेकिन कोई भी राज्य सरकार इतना वेतन मजदूरों को नहीं दे रही है। यदि हम राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की बात करें तो यहां भी मजदूरों को करीब 18 हजार रुपये ही मिलते हैं, जो तय मानक से करीब 2 हजार रुपये कम है। वहीं अन्य राज्यों में ये अंतर और भी ज्यादा देखने को मिलता है, जिससे साफ है कि मजदूरी और जरूरतों के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है।
महंगाई का सबसे बड़ा असर मजदूरों पर
बढ़ती महंगाई का सबसे असर मजदूर वर्ग के लोगों पर पड़ रहा है। ऐसे में सीमित आय में घर चलाना, बच्चों की पढ़ाई कराना और इलाज जैसे जरूरी खर्च पूरे करना आसान नहीं रह गया है। बढ़ती महंगाई के इस दौर में मजदूरी बढ़ाना जरूरी तो है, लेकिन उसे सही स्तर तक पहुंचाना उससे भी ज्यादा जरूरी है। पंजाब, हरियाणा और यूपी का कदम सही दिशा में जरूर है, लेकिन जब तक ये बढ़ोतरी केंद्र के तय स्तर के करीब नहीं पहुंचेगी, तब तक मजदूरों को पूरी राहत मिलना मुश्किल रहेगा।






