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IAS RAJDEEP KHAIRA SUCCESS STORY: इंटरव्यू में हुए रिजेक्ट के बाद भी नहीं मानी हार, लगातार मेहनत से बने IAS, पढिए RAJDEEP KHAIRA की सफलता की कहानी
 
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IAS RAJDEEP KHAIRA SUCCESS STORY: UPSC एग्जाम की तैयारी कर रहे कई अभ्यर्थी इस बारे में कन्फ्यूज रहते हैं कि वे किसे फॉलो करें। तो जवाब है किसी को नहीं। यह सलाह के UPSC-CSE 2020 में यूपीएससी क्लीयर करने वाले डॉ राजदीप सिंह खैरा (Dr Rajdeep Singh Khaira) का। उन्होंने बताया कि यूपीएससी एग्जाम देने के बाद मई 2021 में उनके पिता का कोरोना से निधन हो गया।

Many aspirants preparing for UPSC exam are confused about whom to follow. So the answer is no one. This is the advice of Dr. Rajdeep Singh Khaira, who cleared UPSC in UPSC-CSE 2020. He told that his father died of corona in May 2021 after giving UPSC exam.

सितंबर में उनका इंटरव्यू था, उन्होंने हिम्मत बनाए रखी। इससे पहले भी वह इंटरव्यू राउंड तक पहुंचे थे, लेकिन उनका सिलेक्शन नहीं हुआ। लेकिन इस साल उनकी मेहनत रंग लाई और वह IAS अधिकारी बन कर ही माने। उन्होंने कहा कि इंटरव्यू में कम नंबर आने की आशंका थी, इसीलिए उन्होंने लिखित परीक्षा में ज्यादा नंबर लाने पर फोकस किया। ऐसे में यहां जानें UPSC क्लीयर करने के लिए अभ्यर्थी किस स्ट्रैटजी को फॉलो करें।

असफलता मिलती है तो स्वीकार कीजिए

राजदीप की प्रारम्भिक शिक्षा सेक्रेट हार्ट कॉन्वेंट स्कूल, सराभा से हुई। इसके बाद उन्होंने गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और राजिंदरा हॉस्पिटल पटियाला से एमबीबीएस की डिग्री ली। वर्ष 2017 में उनका चयन मेडिकल ऑफिसर के पद पर भी हुआ था। वर्तमान में वह सिविल अस्पताल कूमकलां में कार्यरत हैं। उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान यूपीएससी परीक्षा में शामिल होने का निर्णय लिया।

Rajdeep did his early education from Secret Heart Convent School, Sarabha. After this he took MBBS degree from Government Medical College and Rajindra Hospital Patiala. In the year 2017, he was also selected for the post of Medical Officer. Presently he is working in Civil Hospital Kumkalan. He decided to appear in UPSC exam while studying MBBS.


 
खैरा कहते हैं कि उनकी पांच साल की जर्नी में सबसे क्रिटिकल चीज यह है कि जब आप तैयारी करते हो तो बहुत बार आपको निराशा हो सकती है। तैयारी के दौरान डिस्ट्रैक्शन बहुत होती है। लेकिन आपको उनसे प्रभावित हुए बिना चलते रहना होता है। यह प्रक्रिया है। असफलता मिलती है तो स्वीकार कीजिए। उसके बाद खुद को खत्म मत कर दीजिए। अगर आपको खुद को प्रूव करना है तो भी आपको लगे रहना है।

Khaira says that the most critical thing in his five-year journey is that when you prepare, you can often get disappointed. There is a lot of distraction during preparation. But you have to keep going without being influenced by them. This is the process. If you fail, accept it. Don't kill yourself after that. Even if you want to prove yourself, you have to persist.

गलतियों से हमेशा सीखते रहें

पहले अटेम्प्ट में वह इंटरव्यू राउंड तक पहुंचे, लेकिन सिलेक्ट नहीं हुए। उनके सामने दो ऑप्शन थे, असफलता से निराश हो जाएं या फिर अपनी गलतियों को सुधार कर आगे बढ़ें। वह दूसरा ऑप्शन चुन कर आगे बढ़ गए।

He reached the interview round in the first attempt but was not selected. They had two options in front of them, be disappointed by failure or move on by correcting their mistakes. He went ahead by choosing the second option.

12वीं में किया डिस्ट्रिक्ट टॉप

10वीं में 91 फीसदी के साथ 12वीं बोर्ड एग्जाम में उन्होंने जिले में टॉप रैंक हासिल की। MBBS में गोल्ड मेडल हासिल किया। शुरुआत से पढ़ाई में अव्वल रहे राजवीर को पहली असफलता UPSC में ही मिली। उनका कहना है कि बाकी अभ्यर्थी क्या कर रहे हैं, इसे न सोच कर उन्हें अपने टारगेट पर फोकस करना चाहिए। उन्होंने तैयारी के दौरान सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी और दूसरे अभ्यर्थियों को भी डिस्ट्रैक्शन से दूरी बनाए रखने की सलाह दी।

He secured the top rank in the district in the 12th board exam with 91 percent in 10th. Won Gold Medal in MBBS. Rajveer, who was a topper in studies from the beginning, got his first failure in UPSC itself. They say that they should focus on their target without thinking about what the rest of the candidates are doing. He kept a distance from social media during the preparation and also advised other candidates to keep distance from distraction.

किसे फॉलो करें?

किसी कोन नहीं. डॉ खेरा ने बताया कि हर अभ्यर्थी के लिए अलग-अलग स्ट्रैटजी काम करती है। एग्जाम से पहले उन्हें बताया गया कि इंटरव्यू के लिए मोक टेस्ट बहुत जरूरी है। यूपीएससी क्लीयर करने का कोई पक्का रूल नहीं है। लेकिन उन्होंने बगैर मोक टेस्ट के ही UPSC क्लीयर कर दिखाई। किसी को भी आंखें बंद कर के फॉलो न करें और खुद पर भरोसा रखते हुए तैयारी करते रहें। 

No one who Dr Khera told that different strategy works for every candidate. Before the exam, he was told that mock test is very important for the interview. There is no fixed rule to clear UPSC. But he appeared to clear UPSC without any mock test. Do not follow anyone blindly and keep preparing with confidence in yourself.

कब मुश्किल हो जाती है यूपीएससी मुश्किल

डॉ खैरा कहते हैं कि खुद पर भरोसा रखिए। यूपीएससी क्लियर करने का कोई पक्का रूल नहीं है कि यह करेंगे तो सफलता मिलेगी। यूपीएससी को जिसे क्लियर करना है। उसे उसी के बारे में सोचना पड़ेगा। एक भूख अंदर होनी चाहिए अगर आप अपनी असफलता से बेचैन नहीं है तो यूपीएससी निकालना मुश्किल हो जाएगा।