Haryana Dc Rate Vacancy

HARYANA DC RATE JOBS

WWW.JOBSHARYANA.COM

HARYANA JOBS PORTAL

बोझ समझकर पैदा होते ही दफना दिया था, आज गुलाबो सपेरा बनकर पूरे भारत का कर रही  नाम रौशन

Jobs Haryana, Gulabo Sapera Success Story

एक ज़माने में देश में बेटियों का पैदा होना मानो अभिशाप माना जाता था। जिस घर में दो-तीन बेटियाँ पैदा हो जाएँ मानो उस परिवार ने कोई गु ना ह कर दिया हो। समाज में बेटियों को जन्म देने वाली महिलाओं को बड़ी ही न भावना से देखा जाता था। ख़ास तौर पर राजस्थान, हरियाणा और पंजाब इस तरह से भे द भाव के मामलों में कहीं आगे खड़े मिलते थे।

gulabo spera

लेकिन आज तस्वीर बदल रही है। खासतौर पर जब से प्रधानमंत्री ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसा अभियान छेड़ा है। तब के बाद से ना सिर्फ़ लोग बेटियों को घर की शान समझने लगे हैं, बल्कि उन्हें अच्छी तरह पढ़ा-लिखा कर उनका भविष्य भी उज्ज्वल करने पर ज़ोर दे रहे हैं। आज हम आपको ऐसी ही मशहूर डांसर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे बचपन में पैदा होते ही दफना दिया गया था। लेकिन क़िस्मत की धनी आज वह लड़की दुनिया में अपना परचम फहरा रही है।

gulabo spera1

गुलाबो सपेरा (Gulabo Sapera)

1960 में इस लड़की का जन्म राजस्थान के अजमेर (Ajmer) जिले में हुआ था। आज देश में इसे ‘गुलाबो सपेरा’ (Gulabo Sapera) के नाम से जाना जाता है। जब गुलाबो का जन्म हुआ तो उस दौरान बेटी का जन्म होना किसी से सुना नहीं जाता था। लिहाजा जब रिश्तेदारों को पता चला कि बेटी का जन्म हुआ है, तभी गुलाबो को दफना दिया गया। ताकि इसकी जीवन लीला समाप्त हो जाये। इसके बाद जब गुलाबों की माँ को होश आया तो माँ से अपने कलेजे के टुकड़े को देखे बिना रहा नहीं गया। मा ने शोर मचा दिया, सबसे मिन्नते की पर किसी ने कुछ नहीं बताया

gulabo

मौसी ने दिया माँ का साथ

गुलाबो की माँ का जब रो-रो कर बुरा हाल था तो उनकी मौसी ने उनका साथ दिया। मौसी ने कहा कि वह जानती हैं उनकी बेटी को कहाँ दफनाया गया है। लेकिन वह भी रात के बारह बजे ही जाएंगी, ताकि किसी को पता ना चले। ऐसे में रात के बारह बजते ही गुलाबो की माँ और मौसी ने मिलकर गुलाबो को निकाला। तब देखा कि गुलाबो की सांसे चल रही हैं। ऐसे में गुलाबो का इलाज़ करवाया और गुलाबो जल्द ही ठीक हो गई।

राजीव गांधी के सामने दी प्रस्तुति

गुलाबो के पिता घर से दूर बीन की धुन पर सांपों को नचाने वाले सपेरे थे। ऐसे में जैसे ही गुलाबो बड़ी हुई अपने पिता के साथ वह भी जाने लगी। पिता की बीन पर वह भी लोगों को नाच कर दिखाती थी। महज़ 17 साल की उम्र में ही गुलाबो का ‘फेस्टिवल ऑफ इंडिया’ (Festival of India) के लिए चयन हो गया। ये कार्यक्रम अमेरिका के वाशिंगटन में होना था। जहाँ उस समय के वर्तमान प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) भी मौजूद थे। ऐसे में गुलाबो ने विदेशी ज़मीन पर अपना डांस करके दिखाया और सभी दर्शक सम्मोहित हो गए।

gulabo spera

गुलाबो पहली महिला थी जिन्होंने ‘कालबेलिया’ (Kalbelia Dance) डांस सबके सामने किया था। ये डांस उन्होंने कहीं से सीखा ना नहीं था, बाल्कि जब वह अपने पिता के साथ जाती थी तो बीन की धुन पर ख़ुद ही करती थी। इसके बाद से जब लोगों ने गुलाबो को देखा तो बेटियों के प्रति अपना नज़रिया बदल दिया। गुलाबो कहती हैं कि यही उनकी कमाई है।

gulaboo spera

धनवंतरी है गुलाबो का असली नाम

गुलाबो का असली नाम आज भी बेहद कम लोग जानते हैं। उनका असली नाम धनवंतरी (Dhanvantari) है। इस नाम के पीछे भी बेहद ख़ास वज़ह है। वह बताती हैं कि बचपन से ही वह बेहद गोरी और गाल से गुलाबी थी। ऐसे में उनके पिता उन्हें हमेशा से गुलाबो ही कहकर पुकारते थे। साथ ही उनके समाज में अभी तक सरनेम लगाने का चलन नहीं था। ऐसे में लोगों ने उनके डांस के चलते ‘गुलाबो सपेरा’ कहने लगे।

ये भी पढ़ें-  माता-पिता ने बेटे की पढाई के लिए बेचे गहने और मकान, बेटा 26वीं रैंक हासिल कर बना IAS, जानिए टॉपर प्रदीप सिंह की कामयाबी की कहानी

आज ख़ूब लोकप्रिय है कालबेलिया नृत्य (Kalbelia Dance)

कालबेलिया नृत्य (Kalbelia Dance) केवल महिलाओं द्वारा किया जाता है। इस नृत्य को महिलाएँ पूरी तरह से शृंगार करके करती हैं। गुलाबो ने कालबेलिया नृत्य कहीं से सीखा नहीं है, बल्कि वह ख़ुद ही इसकी जन्मदाता हैं। वह अपने पिताजी के साथ इस नृत्य को करती थी। फिर धीरे-धीरे ये नृत्य लोकप्रिय हो गया। आज राजस्थान (Rajasthan) में इस नृत्य को देखने लोग देश-विदेश से आते हैं।

बोझ समझकर पैदा होते ही दफना दिया था, आज गुलाबो सपेरा बनकर पूरे भारत का कर रही  नाम रौशन

Scroll to Top