खुद पर विश्वास और परिवार का साथ मिला तो किसान की बेटी बनी IAS ऑफिसर, जाने, IAS Tapasya की कहानी

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हर कामयाब इंसान किसी ना किसी क्षेत्र में असफल होने के बाद ही अपनी सफलता हासिल करता है | ऐसे कई उदाहरण आपको मिल जाएंगे जहां इंसान अपनी असफलताओं से ही सफल हुआ है | इसी बीच हम बात कर रहे हैं IAS Tapasya की जो आज कई लोगों के लिए प्रेरणा है | उनके लिए आईएएस तक का सफर आसान नहीं था लेकिन परिवार का स्पोर्ट और खुद पर की मेहनत ने उन्हें आज इस मौकाम तक पहुंचाया है |

IAS Tapasya Parihar मध्य प्रदेश के जिले नरसिंहपुर के छोटे से गांव जोवा से संबंध रखती हैं| उनके पिता एक किसान हैं और इस किसान की बेटी ने वो कर दिखाया जिसकी आज लोग मिसाल देते हैं | गांव में होने के कारण बढ़ती उम्र के साथ ही रिश्तेदारों ने बेटी की शादी की बात कही तो परिवार ने शादी को तवज्जों ना देते हुए बेटी को पढ़ाना सही समझा और उन्हें पढ़ाया व उच्च शिक्षा दिलवाई | जिसका ही परिणाम है कि आज एक किसान की बेटी ias अफसर है |तपस्या ने दिन रात मेहनत की और परिवार के विश्वास पर खरी उतरी व  बहुत अच्छी रैंक से यूपीएससी का एग्जाम पास किया |

पढ़ाई में शुरू से अच्छी रही तपस्या

तपस्या IAS Tapasya Parihar एक ज्वाइंट परिवार में पली बढ़ी हुई | पिता विश्वास परिहार खेती करते हैं और उनकी माता ज्योति सरपंच हैं | परिवार ने पढ़ाई के लिए हमेशा प्रेरित किया जिसका नतीजा ये रहा कि उन्होंने दसवीं और बाहरवीं में भी अव्वल स्थान प्राप्त किया | बेटी को पढ़ाई में अच्छा देख परिवार ने तपस्या को UPSC की परीक्षा देने के लिए कहा | जिसके बाद उन्होंने भी इस परीक्षा में हिस्सा लेने का विचार बनाया | स्कूल में अच्छा स्थान पाने के बाद उन्होंने नेशनल लॉ सोसाइटीज़ लॉ कॉलेज, पुणे से लॉ में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की | जिसके बाद हौसला बढ़ा और परिवार ने विश्वास करते हुए बेटी को दिल्ली UPSC की तैयारी करने के लिए रवाना किया | जहां उन्होंने UPSC की परीक्षा क्रेक करने को लेकर तैयारी की |

दादी ने हमेशा बढ़ाया हौसला

तपस्या IAS Tapasya Parihar आज अपनी सफलता का श्रेय अपनी दादी को भी देती हैं उन्होंने बताया कि दिल्ली में परिवार से दूर रहकर भी उनकी दादी उन्हें फोन के जरिए हमेशा हौसला देती थी और एक सकारात्मक सोच उन्हें प्रदान करती थी | जहां एक ओर घर के बुजर्ग बेटियों को घर से बाहर जाने के लिए मना करते हैं या फिर पढ़ने लिखने की बजाय शादी का जोर बनाते हैं वहीं तपस्या की दादी देवकुंवर परिहार ने इस सोच से दूर अपनी पोती को हमेशा ही पढ़ाने की बात कही | अपनी दादी की बात सुन तपस्या काफी मोटिवेट होती रहीं और अपनी मेहनत जारी रखी |

सेल्फ स्टडी पर दिया ध्यान

तपस्या ने अपनी कामयाबी का मंत्र बताते हुए एक साक्षात्कार के दौरान में कहा कि सेल्फ स्टडी जरूर करनी चाहिए और कोचिंग सेंटर पर ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहिए | उन्होंने बताया कि कोचिंग सेंटर में एक समय में कई बच्चे होते हैं और अध्यापक हर किसी पर ध्यान नहीं दे सकता | ऐसे में बच्चों को सेल्फ स्टडी अपनानी चाहिए क्योंकि सेल्फ स्टडी ही आपको सफलता दिलवा सकती है | तपस्या पहली बार में असफल होने के कारण भी सेल्फ स्टडी की कमी को मानती हैं उन्होंने बताया कि वो पूरी तरह से कोचिंग सेंटर पर भरोसा कर बैठी थी लेकिन कोचिंग से ज्यादा सेल्फ स्टडी जरूरी है |दसरी बार में परीक्षा देने के बाद ही उन्होंने 2017 में यूपीएससी की परीक्षा में 23वां रैंक हासिल किया है |

‘अधिकतर पढ़ाई से ज्यादा जरूरी प्लानिंग है’

तपस्या IAS Tapasya Parihar ने बताया कि वो जिस दौरान परीक्षा की तैयारी कर रही थी तब वो 14 से 16 घंटों तक नहीं पढ़ी लेकिन उन्होंने 8 से 10 घंटे की स्टडी में एक स्ट्रेटेजी अपनाई और उसके अनुसार रोज पढ़ाई की | प्री के पहले 8 से 10 घंटे पढ़ाई की जो मेन्स के समय 12 घंटे तक पहुँची पर इससे ज़्यादा नहीं’ |

परीक्षा में पास होने के बाद भी नहीं हुआ यकीन

तपस्या IAS Tapasya Parihar बताती हैं कि जिस समय उनके परीक्षा के रिजल्ट सामने आए उस दौरान उन्हें बिल्कुल यकीन नहीं हुआ था कि वो पास हो गई क्योंकि उनका कहना था कि वो परीक्षा में अपना 100 प्रतिशत नहीं दे पाई थी | जिस लिए ही अपने रिजल्ट पर यकीन करना काफी मुश्किल था |

 

 

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