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Haryana Toll Tax: हरियाणा में टोल टैक्स से अरबों रुपये कमा रही कंपनियां, लेकिन वाहनों का ये हाल, देखिये पूरी रिपोर्ट

करनाल अंबाला और लुधियाना (लाडोवाल) लोकेशन पर 2009 में टोल लगाए गए थे। इस प्रोजेक्ट को साल 2011 तक पूरा करना था जो अभी तक अधूरा है। मार्च 2021 में एग्रीमेंट की शर्तों के उल्लंघन के चलते सोमा कंपनी का टेंडर रद कर दिया। 
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हरियाणा में टोल टैक्स से अरबों रुपये कमा रही कंपनियां, लेकिन वाहनों का ये हाल, देखिये पूरी रिपोर्ट

अंबाला। पानीपत-जालंधर सिक्सलेन में जनता से टैक्स वसूलने के लिए तीन जगहों पर टोल लगाकर अरबों रुपयों की कमाई की गई। लेकिन टेंडर में सुविधाओं की जो शर्तें थीं, वह अब चौदह साल बाद पूरी होनी शुरू हुई हैं। नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया (एनएचएआइ) और सोमा आइसोलक्स में 550 करोड़ के टोल प्लाजा पर आमदनी के शेयर को लेकर अन्य शर्तों के उल्लंघन का विवाद ट्रिब्यूनल में पहुंचा हुआ है। इस विवाद के बीच टोल प्लाजा पर करोड़ों की लागत से खरीदीं दस एंबुलेंस, दो बड़ी क्रेन, छोटी क्रेन, जीप व अन्य वाहन कंडम हो रहे हैं।

पानीपत-जालधंर सिक्सलेन पर चौदह साल बाद अब मिलनी शुरू हुईं सुविधाएं

दरअसल, एनएचएआइ ने टोल का टेंडर किसी अन्य कंपनी को दिया हुआ है और उक्त मशीनरी अथवा वाहन पुराने टेंडर का हिस्सा हैं। विवाद आर्बिट्रेशन में है और ठीक कंडीशन में गाड़ियां धूल फांक रहीं हैं। जब तक इस विवाद का हल नहीं होता, तब तक इन गाड़ियों का क्या करना है, उस पर भी कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता। 

इस हाईवे पर तीन टोल पर होती रही वसूली 

बता दें कि सन 2009 में करनाल, अंबाला और लुधियाना (लाडोवाल) लोकेशन पर टोल लगाए गए थे। इस प्रोजेक्ट को साल 2011 तक पूरा करना था, जो अभी तक अधूरा है। मार्च 2021 में एग्रीमेंट की शर्तों के उल्लंघन के चलते सोमा कंपनी का टेंडर रद कर दिया, जिसके बाद विवाद ट्रिब्यूनल में पहुंच गया। ऐसे में सोमा कंपनी की एंबुलेंस इस हाईवे पर हुए हादसों में घायलों को अस्पताल पहुंचाती रहीं और खराब गाड़ियों व दुर्घटना में क्षतिग्रस्त वाहनों को हाईवे से हटाने वाली गाड़ियां घग्गर टोल के पास रखी हैं। जब तक विवाद का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक इन वाहनों को न तो नीलाम किया जा सकता है और न ही इनको सड़क पर उतारा जा सकता है।

2024 तक था एग्रीमेंट, काम अब भी अधूरे

तीन टोल पर वसूली तो साल 2009 से होती रही, लेकिन जो सर्विस लेन में स्ट्रीट लाइट लगाने, पुल का निर्माण पूरा करने, फुटपाथ, बरसाती पानी निकासी आदि का कार्य अभी तक अधर में लटका हुआ है। यह टोल प्लाजा 2024 में खत्म हो जाने थे और सुविधाएं 2011 से मिलनी शुरू होनी चाहिए थीं। अब एनएचएआइ को यह काम पूरे करवाने के लिए दूसरी कंपनी को टेंडर अलाट करने पड़ रहे हैं। 

रेनेज सिस्टम ने खोल दी पोल

पानीपत से जालंधर सिक्स लेन प्रोजेक्ट में बना ड्रेनेज सिस्टम लोगों के लिए परेशानी बना हुआ है। भारी बरसात के दिनों में हाईवे की सर्विस लेन पर पानी भर जाता है। इसी से होकर वाहन चालकों को आवाजाही करनी पड़ती है। ड्रेनेज सिस्टम ही ठीक से नहीं बना, जिसके कारण यह दिक्कत है। इसी को दूर करने के लिए अब एनएचएआइ टेंडर जारी कर रही है, ताकि ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त किया जाए और लोगों को सुविधा मिले।

तीन टोल पर सालाना 600 करोड़ रुपये की कमाई 

इस हाईवे पर बनाए गए तीन टोल पर सालाना 600 करोड़ रुपये सोमा आइसोलक्स कमाती रही, लेकिन एनएचएआइ का शेयर नहीं दिया। हरियाणा के करनाल और अंबाला, जबकि लुधियाना के पास लाडोवाल टोल प्लाजा है। इन तीनों टोल प्लाजा से एनएचआइ को उसका करीब 550 करोड़ रुपये का शेयर न मिलने पर रिकवरी निकाली है। करीब ग्यारह साल बाद आज भी यह प्रोजेक्ट आधा अधूरा है।

विवाद निपटने तक करना होगा इंतजार : प्रोजेक्ट डायरेक्टर 

एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर वीरेंद्र सिंह का कहना है कि सोमा आइसोलक्स के साथ विवाद अभी ट्रिब्यूनल में है। यह सही है कि टोल पर काफी गाड़ियां खड़ी हैं। जब तक इस विवाद का समाधान नहीं निकलता, तब तक गाड़ियों को लेकर कुछ नहीं किया जा सकता।

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