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G-20: 67% आबादी, 75 प्रतिशत कारोबार पर कब्‍जा, 3 वजहों से भारत सेट करेगा इनका एजेंडा

G-20 India 2022: भारत में G-20 सम्मेलन का होना, दुश्मन देशों के लिए ये चिंता का विषय हो सकता है. गौरतलब है कि इसका आयोजन करने वाले देशों को ट्रोइका कहा जाता है, इसलिए उनके मुद्दों को अहम माना जाता है. अगर ऐसा हुआ तो सीमा विवाद और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर पड़ोसियों की चिंता बढ़ने वाली है. 

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G-20: 67% आबादी, 75 प्रतिशत कारोबार पर कब्‍जा, 3 वजहों से भारत सेट करेगा इनका एजेंडा

India Hosting G20 Summit 2022: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने कहा है कि G-20 समूह की आगामी बैठक की मेजबानी करना भारत की आजादी के 75वें वर्ष में गौरव की बात होने के साथ देश लिए एक महान अवसर है. प्रधानमंत्री ने एक ऑनलाइन कार्यक्रम के दौरान भारत की जी-20 की अध्यक्षता के लोगो, थीम और वेबसाइट का अनावरण करने के बाद यह टिप्पणी की. ऐसे में भारत समेत पूरी दुनिया के लिए क्यों खास है इस बार के जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन आइए जानते हैं.

भारत के दुश्मनों की बढ़ी चिंता

भारत में G-20 सम्मेलन का होना, दुश्मन देशों के लिए ये चिंता का विषय हो सकता है. गौरतलब है कि इसका आयोजन करने वाले देशों को ट्रोइका कहा जाता है, इसलिए उनके मुद्दों को अहम माना जाता है. अगर ऐसा हुआ तो सीमा विवाद और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर पड़ोसियों की चिंता बढ़ने वाली है. G-20, ऐसे देशों का समूह है, जो दुनिया का एजेंडे सेट करते हैं. हम आपको G-20 देशों की शक्ति के बारे में बताना चाहते हैं.

G-20 को विस्तार से समझने की जरूरत

G-20 देशों में दुनिया के 20 विकसित और विकासशील देश शामिल हैं. इसमें भारत समेत अमेरिका, यूके, रूस, चीन, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा जैसे देश हैं. कुल 20 देशों की लिस्ट इस वक्त हम आपको आपकी टीवी स्क्रीन पर दिखा रहे हैं.
G-20: 67% आबादी, 75 प्रतिशत कारोबार पर कब्‍जा, 3 वजहों से भारत सेट करेगा इनका एजेंडा

G-20 की इकॉनमी दुनिया की 85% GDP

कुल मिलाकर G-20 में शामिल देशों की अर्थव्यवस्थाएं, इस दुनिया की 85 प्रतिशत जीडीपी के बराबर हैं. यानी दुनिया का 85 प्रतिशत उत्पादन, इन देशों में होता है. देखा जाए तो ये सारे देश मिलकर पूरी दुनिया चला रहे हैं. इसके अलावा दुनिया के कुल अंतरराष्ट्रीय व्यापार में इन 20 देशों की हिस्सेदारी 75 फीसदी है. इससे आप समझ सकते हैं कि करीब करीब पूरी दुनिया ही इन 20 देशों पर निर्भर है.

'दुनिया की करीब 67% आबादी G-20 में'

दुनिया की 67 फीसदी आबादी G-20 देशों में ही रहती हैं. दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाले 4 देश, चीन, भारत, अमेरिका और इंडोनेशिया, G-20 का ही हिस्सा हैं. वैसे हमारा पड़ोसी पाकिस्तानी , 5वां सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है, लेकिन वो G-20 में शामिल नहीं हो पाया है. जबकि आबादी के लिहाज से 6ठा बड़ा देश ब्राजील है, वो G-20 का हिस्सा है.

G-20 में इस बार ये देश मेहमान

G-20 समिट की अध्यक्षता करने वाला भारत, कुछ अतिथि देशों को भी आमंत्रित कर रहा है. इसमें बांग्लादेश, मिस्र, मॉरीशस, नीदरलैंड, नाइजीरिया, ओमान, सिंगापुर, स्पेन और यूएई शामिल हैं.

कोविड महामारी के बाद से दुनिया में जिस तरह के हालात बने हुए हैं, उसको सुधारने के लिए G-20 देशों की पहल, बहुत जरूरी हैं. मुमकिन है इस बार की बैठक में इस पर चर्चा हो. और इसकी अगुवाई भारत करे.

दुनिया की निगाहें भारत पर टिकी

वैसे जहां तक भारत की बात है, तो भारत इस बैठक के आयोजन के साथ ही, एक साफ्ट पावर के तौर पर अपनी पहचान बना रहा है. आने वाले समय में पूरी दुनिया की निगाहें भारत पर ही टिकी हुई हैं. इस वक्त पूरी दुनिया, आर्थिक मंदी के मुहाने पर खड़ी है. कोविड के बाद वैश्विक व्यापार पर असर पड़ा है, गरीब देश और गरीब हुए हैं, वैश्विक असामनता बढ़ी हैं. इस वक्त पूरी दुनिया में महंगाई ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गयी है. कई विकसित देश भी खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं. ऐसे में सभी देश भारत की ओर, उम्मीद भरी निगाहों से देख रहे हैं.

'2023 में भारत दुनिया की तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था होगी'

IMF के मुताबिक वर्ष 2023 में भारत, दुनिया की तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक होगी. IMF के मुताबिक अगले साल जर्मनी, रूस और इटली जैसे मजबूत और बड़ी अर्थव्यवस्थाएं कमजोर होती जाएंगी. अगले साल यूके की विकास दर 0.3 प्रतिशत, अमेरिका की विकास दर केवल 1 प्रतिशत रहेगी. हालांकि इस नाजुक दौर में भी भारत की अर्थव्यवस्था 6.1 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ेगी.

तीन वजहों से भारत पर टिकी दुनिया की निगाहें

IMF के इस आंकड़े से साफ है कि भारत, अगले साल एक मजबूत अर्थव्यवस्था के तौर पर विकासित होगा और यही बात दुनिया को भारत की तरफ आकर्षित कर रही है. सभी देश, भारत पर उम्मीदें टिकाए हुए हैं. हम आपको तीन ऐसी वजह बताते हैं, जिसकी वजह से भारत, दुनिया के पहिए की धुरी बना हुआ है.

1. यूक्रेन-रूस युद्ध में भारत का रोल

दरअसल भारत के रूस के साथ दोस्ताना संबंध हैं. यूक्रेन और उसके समर्थक पश्चिमी देशों के साथ भी भारत के संबंध अच्छे हैं. इस युद्ध के समाधान को लेकर पूरी दुनिया, भारत से पहल करने गुजारिश करती रही है. सभी को मालूम है, कि इस युद्ध को अगर कोई देश रोक सकता है, या दोनों देशों में संधि करवा सकता है, तो वो केवल भारत है. भारत ने अभी तक इस युद्ध को लेकर न्यूट्रल रुख अपनाया हुआ है. हालांकि कई वैश्विक मंचों पर भारत ने युद्ध रोककर, शांतिपूर्ण हल निकालने की बात कही है.

2. कोरोना महामारी में भारत ने की दुनिया की अगुवाई

कोविड महामारी के दौरान भारत की वसुधैव कुटुंबकम वाली संस्कृति देखकर, दुनिया को अहसास हो गया, कि भारत विश्व पटल पर एक मददगार देश है. भारत ने महामारी काल में कोविड वैक्सीन पूरी दुनिया को सप्लाई की थी. गरीब देशों को भारत ने मुफ्त में वैक्सीन उपलब्ध करवाई थी. कोविड काल में भारत ने दुनिया के 101 देशों को 23 करोड़ 90 लाख वैक्सीन डोज दी थी.

3. दुनिया में बढ़ रही खाद्य असुरक्षा

दुनिया में बढ़ रही खाद्य असुरक्षा को लेकर भारत की पहल को दुनिया ने सराहा था. रूस और यूक्रेन, पूरी दुनिया में अनाज के बड़े सप्लायर हैं, लेकिन इन देशों के बीच चल रहे युद्ध की वजह से, कई देशों में खाद्य असुरक्षा की स्थिति बन गई थी. पिछले महीने रूस और यूक्रेन के बीच एक संधि हुई, जिसके बाद अनाज की सप्लाई शुरू कर दी गई है. भारत की पहल से ही, रूस और यूक्रेन के बीच ये संधि हुई थी. दुनिया पर आया खाद्य संकट, भारत की वजह से टल गया. पूरी दुनिया, वैश्विक मामलों में भारत की पहल की अहमियत समझ रही है.

G-20 समिट का भारत में होना क्यों अहम?

यही वजह है कि G-20 समिट का भारत में होना, ना सिर्फ भारत के लिए, बल्कि कई अन्य विकासशील देशों के लिए भी अहम है. G-20 की, भारत के लिए क्या अहमियत है, इसको लेकर हमने एक्सपर्ट्स से भी बात की उन्होंने कहा कि इस बैठक के कई मायने हैं. क्योंकि भारत में होने जा रहा G-20 का आयोजन, उसे विश्व पटल पर अहम देश बनाएगा. जिससे वो दुनिया की महाशक्तियों के आगे, अपनी बात, अपने मुद्दे, अपनी आकांक्षाएं और अपनी उम्मीदों को मजबूती से रख सकेगा.

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