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Chanakya Niti : जवानी की ये भूल, स्त्री हो या पुरुष फिर सुधारी नहीं जा सकती

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जवानी की ये भूल, स्त्री हो या पुरुष फिर सुधारी नहीं जा सकती

Chanakya Niti : आचार्य चाणक्य ने ना सिर्फ राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर अपनी राय नीति शास्त्र में सामने रखी है बल्कि पारिवारिक परेशानी , स्त्री पुरुष की रिश्तों से जुड़े कई अनछुए पहलू भी उजागर किये हैं. आचार्य चाणक्य कहते हैं कि अगर ये भूल स्त्री हो या फिर पुरुष हो कोई भी करता है तो जिंदगी को बर्बाद होने से कोई नहीं रोक सकता है.

बुरी संगत 
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि इंसान की पहचान उसके आस पास के लोगों से होती है, ऐसे में स्त्री या पुरुष हो अगर संगत गलत होगी तो फिर भविष्य बर्बाद भी हो सकता है. कामवासना, लड़ाई-झगड़ा, नशा  करने वाले लोगों से हमेशा दूर रहना चाहिए. ये सब जवानी के दिनों में अच्छा लग सकता है लेकिन बुढ़ापा आते-आते ये दुख का कारण बनता है और इंसान बर्बाद हो जाता है.

क्रोध 
गुस्सा जवानी के दिनों में हमेशा नाक पर होता है. ऐसे में स्त्री हो या पुरुष गलत फैसले कर लेते हैं और बाद में पछताते हैं. जिंदगी में कामयाबी के लिए खुद पर नियंत्रण जरूरी है. आचार्य चाणक्य कहते हैं कि गुस्सा विनाश का कारक है और क्रोध में रहने वाला कोई भी इंसान जिंदगी के इसी भी पहलू में तरस्की नहीं कर सकता. 

आलस
अक्सर आपने बुजुर्गों को कहते हुए सुना होगा कि अगर जवानी में मेहनत कर ली तो बुढ़ापा संवर जाएगा और अगर आलस किया तो पछताने के अलावा कुछ नहीं रह जाएगा. वो स्त्री पुरुष जो अपनी जवानी को बेकार की बातों और घूमने फिरने में लूटा देते हैं कभी कामयाबी का स्वाद नहीं चख पाते. ऐसे स्त्री पुरुष अंत में जाकर दूसरों की तरक्की से जलते हैं और नफरत लिए जिंदगी भर पछताते रहते हैं.

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