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Alert: हरियाणा में 19 सितंबर को बंद रहेंगी अनाज मंडिया, नहीं होगी अन्नदाता के अनाज की खरीद

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Alert: हरियाणा में 19 सितंबर को बंद रहेंगी अनाज मंडिया, नहीं होगी अन्नदाता के अनाज की खरीद

सिरसा :- सरकार द्वारा चलाई गई ई- नेम प्रणाली के विरोध में 19 सितंबर को पूरे हरियाणा की मंडियों में अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी. सिरसा जिले के प्रधान मनोहर मेहता ने बताया कि गत दिवस जिले के प्रधान सुरेंद्र मिचनाबादी की अध्यक्षता में जिले भर की 7 मंडियों के प्रधानों की एक बैठक की गई थी, जिसमे किसानों से अपील की गई की वह 19 September को अपनी फसलों को लेकर मंडियों में ना आए, क्योंकि अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते मंडियों में फसलों का लेनदेन नहीं किया जाएगा. 

19 सितंबर को जिले भर में की जाएगी अनिश्चितकालीन हड़ताल 

बैठक के दौरान जिला मंडी प्रधान सुरेंद्र मिचनाबादी ने मंडियों के प्रधानों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की ई- नेम प्रणाली बिल्कुल भी तर्कसंगत नहीं है, इस प्रणाली से आढ़तियो को विभिन्न Problems का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने बताया कि 10 September को की गई गोहाना रैली में आढ़तियो ने फैसला लिया था कि यदि 17 सितंबर तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है तो 19 सितंबर को प्रदेश की सभी मंडियों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया जाएगा. 

ई- नेम प्रणाली को खत्म करने की उठाई मांग 

इस बैठक के दौरान डबवाली प्रधान गुरदीप कामरा, सिरसा के आढ़ती सचिव दीपक मित्तल, ऐलनाबाद के प्रधान जयसिंह गोदारा, सिरसा जिले के Chairman दुलीचंद गांधी, कालावाली प्रधान राकेश कुमार, रवि गोदारा, मनोज कुमार आदि उपस्थित रहे. इस बैठक में सभी ने मिलकर सरकार से ई- नेम प्रणाली को समाप्त करने की मांग उठाई, और उनकी मांग पूरा नहीं करने पर 19 सितंबर को अनिश्चितकालीन हड़ताल करने की बात कही. 

 
 

ई- नेम प्रणाली से किसानों को उठाना पड़ेगा नुकसान 

सिरसा जिले के आढ़ती Association के प्रधान मनोहर मेहता ने बताया कि हरियाणा की गठबंधन सरकार ने ई- नेम खरीद प्रणाली लागू करने का फैसला लिया है, इस प्रणाली के तहत सरकार Computer के माध्यम से अनाज मंडियों में माल खरीदा जाएगा, और माल की E- Payment सीधे किसानों के खाते में की जाएगी. जो व्यापारी फसल खरीद करेगा वह नमी और तोल के नाम पर किसानों का पैसा काटेंगे और मनमर्जी के भाव पर फसल खरीदेंगे. सरकार का यह निर्णय बिल्कुल भी तर्कसंगत नहीं है. इस प्रणाली की वजह से किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा. 

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