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हरियाणा में भारतीय सेना भर्ती को लेकर हो रहा जगह-जगह बवाल, भर्ती रुकने और ओवरएज का क्या है पूरा मामला?

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हरियाणा के भिवानी के तालू गांव में रहने वाले 23 साल के पवन पंघाल ने दो हफ्ते पहले आत्महत्या कर ली. पवन ने आत्महत्या इसलिए की क्योंकि वो सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहा था. उसने मेडिकल से लेकर फिटनेस तक का सारा टेस्ट पास कर लिया था, लेकिन कोरोना महामारी के चलते सेना की भर्ती रुकी हुई थी और वो ओवरएज हो गया था. पवन 15 साल की उम्र से सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहे थे. 

पवन पंघाल रोज अपने घर के पास बने स्कूल में दौड़ा करते थे. उन्होंने फौज में भर्ती होने के लिए खूब मेहनत की, लेकिन दो साल से अटकी भर्ती के कारण वो ओवरएज हो गए. जब सेना में भर्ती होने का उनका सपना टूटा तो जीने की उम्मीद भी टूट गई और उन्होंने फांसी लगा ली. पवन जिस स्कूल के ट्रैक पर दौड़ा करता था, वहीं के एक पेड़ पर फांसी पर लटक गए.

पवन ने तो उम्मीद छोड़कर मौत को गले लगा लिया. लेकिन अभी भी लाखों युवा सेना में भर्ती होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं. इनमें से ज्यादातर ऐसे हैं जिन्होंने मेडिकल और फिटनेट टेस्ट पास कर लिया है, लेकिन कोरोना के चलते दो साल से लिखित परीक्षा नहीं हो पा रही है.

सेना में भर्ती अटकी रहने के कारण देशभर में युवा प्रदर्शन कर रहे हैं. बिहार के दरभंगा में तो रविवार को अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा. उन्होंने जाम लगा दिया और आगजनी कर प्रदर्शन शुरू कर दिया. नाराज अभ्यर्थियों का कहना है कि वो सभी शारीरिक परीक्षा पास कर चुके हैं, लेकिन कोरोना का हवाला देकर दो साल से लिखित परीक्षा टाली जा रही है. उनका कहना है कि कोरोना में सारे काम हो रहे हैं, लेकिन सेना में भर्ती के लिए लिखित परीक्षा नहीं हो रही है.

सेना में अब भी 80 हजार से ज्यादा पद खाली

इसी साल 16 मार्च को रक्षा मंत्रालय की संसदीय समिति की रिपोर्ट संसद में पेश हुई थी. इस रिपोर्ट में बताया गया था कि 1 मार्च 2022 तक सेना में 12 लाख 12 हजार हजार जवान मौजूद हैं. अभी भी 81 हजार जवानों की कमी है. यानी, जितनी जरूरत है, उस हिसाब से जवानों की संख्या 6.7% कम है. 

भारतीय सेना में भर्ती के लिए सेना रैलियों का आयोजन करती है. इस रैली में युवा हिस्सा लेते हैं और इसके बाद कॉमन एंट्रेस टेस्ट होता है. 25 मार्च को लोकसभा में रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने बताया था कि 2020-21 में 97 रैलियां आयोजन करने की योजना थी, जिसमें से 47 रैलियां ही हुईं और सिर्फ 4 के लिए कॉमन एंट्रेस टेस्ट हुआ. 

इसी तरह 2021-22 में 47 रैलियों का आयोजन करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन इसमें से सिर्फ 4 रैलियां ही हो सकीं. इस साल एक भी कॉमन एंट्रेस टेस्ट नहीं हुआ. सरकार का कहना है रैलियों बड़ी संख्या में युवा शामिल होते हैं और इससे कोरोना का संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है. 

कोरोना के चलते जहां सेना में भर्ती अटकी रही तो वहीं नौसेना और वायुसेना में भर्ती जारी रही. 21 मार्च को राज्यसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया था कि 2020-21 और 2021-22 में कोरोना के कारण सेना में भर्ती नहीं हुई. लेकिन इसी दौरान नौसेना में 8,319 और वायुसेना में 13,032 भर्तियां हुईं.

हर साल सेना में कितनी भर्तियां?

तीनों सेनाओं में सबसे ज्यादा भर्ती सेना में ही होती है. बीते 7 साल में सेना में हर साल औसतन 60 हजार भर्तियां हुईं. 7 साल में सबसे ज्यादा भर्ती 2019-20 में हुई. उस साल 80 हजार से ज्यादा जवान सेना में भर्ती हुए. वहीं, 2014-15 में सबसे कम भर्ती हुई थी. उस साल 32 हजार से भी कम जवान सेना में शामिल हुए थे. 

सेना में भर्ती दो साल से ऐसे समय अटकी हुई है, जब लद्दाख और पाकिस्तान के साथ लगने वाली सीमा पर सेना गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है. दो साल से लद्दाख सीमा पर चीन के साथ तनाव बना हुआ है. पाकिस्तान के साथ लगने वाली सीमा पर भी दोनों देशों की सेनाओं में अक्सर टकराव होता रहता है.

लेकिन क्या सरकार मौका देगी?

सेना में जवान के तौर पर भर्ती होने के लिए 23 साल तक की आयुसीमा है. सरकार कोरोना के कारण अटकी भर्तियों से ओवरएज हो चुके युवाओं को कोई मौका देने के मूड में नहीं है. 21 मार्च को राज्यसभा में सवाल पूछा गया था कि क्या सरकार बीते तीन साल के दौरान आयु सीमा पार कर चुके युवाओं को कुछ छूट देकर सेना में भर्ती होने का मौका देगी. इसके जवाब में रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने बताया था कि थल सेना और वायुसेना ने ऐसा कोई विचार नहीं किया है. हालांकि, नौसेना में नौकरी के युवाओं को 6 महीने की छूट दी गई है.

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